सस्ते का फंडा!!
May 29th, 2007 by amit | 4 Comments
अभी तक हवा में उड़ते हुए महँगे रेस्तराओं की आपको सैर करवाई, श्रीश बाबू उखड़ गए और बोले कि दिल्ली में महँगा खाना मिलता है!! मैंने कहा कि भई केवल महँगा ही नहीं मिलता, सस्ता भी मिलता है जो कि बढ़िया भी होता है। तो इसलिए अपन भाव गिरा दिए और अब दिखाते हैं सस्ते का फंडा।
कोई ज़्यादा दिन नहीं हुए रहे, पिछले सोमवार की ही बात है। शाम को मन हुआ कि कहीं हो आएँ, मदन से पूछा कि भई कितने बजे ऑफिस से छूट रहा है; उत्तर मिला कि थोड़ी देर में, तो अपन अपनी जगमग मोटरसाइकिल पर सवार हो पहुँच गए वज़ीरपुर स्थित उसके ऑफिस कॉमप्लेक्स में। वहाँ के बीकानेरवाले की काफी तारीफ़ मदन से सुन चुका था, तो सोचा कि वहीं रात्रिभोज किया जाए।
चूंकि ज़रा जल्दी पहुँच गए थे, इसलिए सोचा कि हल्का फुल्का लिया जाए, इसलिए केसरिया लस्सी ली गई। अब लस्सी की जगह मुझे तो वह घुटा हुआ क्रीम लगा, बहुत ही गाढ़ी थी, लेकिन बढ़िया भी थी इस बात से इंकार नहीं।
बतियाते हुए शीघ्र ही समय बीत गया तो सोचा कि अब भोजन कर लिया जाए। मदन ऑफिस में दावत उड़ा के आया था इसलिए उसको कोई खासी भूख नहीं लगी थी, लेकिन मैंने उसको फिर भी अपने साथ थोड़ा बहुत चखने के लिए मना लिया। अब क्योंकि काफी दिन हुए घर से बाहर उत्तर भारतीय खाए हुए, इसलिए यहाँ वही लेने की सोची। वैसे भी यहाँ के चाईनीज़ और दक्षिण भारतीय भोजन का भरोसा नहीं, इसलिए मैंने तन्दूरी प्लैट्टर(tandoori platter) और कॉफ़ी फ्लेवर का मिल्क शेक लिया। मेरे अनुभवानुसार प्रत्येक बीकानेरवाले पर केवल शाकाहारी भोजन मिलता है।
तो इस तन्दूरी प्लैट्टर में क्या-२ था?
शाकाहारी सीख क़बाब, पनीर टिक्का, तन्दूरी मशरूम और एकाध अन्य आइटम से भरा हुआ था वह तन्दूरी प्लैट्टर। साथ में मिली एक बड़ी सी नान और दाल मक्खनी!!
ऑर्डर करते समय मेनू में पढ़ने से तो कुछ खास(अधिक) नहीं लगा लेकिन जब तैयार हो सर्व हुआ तो पहली नज़र में पता चल गया कि कुछ अधिक हो गया है(और साथ में मिल्क शेक भी), इतना माल हजम नहीं हो पाएगा, मदन को थोड़े से कुछ अधिक ठूँसना होगा!!

तन्दूरी माल लज़ीज़ था, इसमें दो राय नहीं। सीख क़बाब नाज़ुक और स्वादिष्ट थे, मांसाहार का अच्छा अनुभव होने के कारण ही पता चल पा रहा था कि यह शाकाहार है। पनीर टिक्के के रूप में पनीर के अच्छे खासे आकार के क्यूब थे, अन्य जगहों की तरह छोटे टुकड़े नहीं थे। यदि उपलब्ध आइटम और कीमत को देखा जाए तो यह अन्य रेस्तराओं, जिनमें चीनी भोज किया गया, से सस्ता भी था। तंदूरी प्लैट्टर पिच्चान्वे रूपए में निपट गया, यदि थोड़ी अधिक भूख लगी होती तो इसका अधिक आनंद लिया जाता। बेचारा मदन, उसको न-न करते हुए भी थोड़ा बहुत खिला ही दिया, फिर भी सब माल साफ नहीं किया जा सका। यानि कि इस तन्दूरी प्लैट्टर में दो लोग निपट सकते हैं, एक अकेला तभी खा सकता है जब वह या तो बहुत जगह रखता हो(पेट में, और कहाँ??) या फिर पूरे दिनभर का भूखा हो।
मिलने को यहाँ किसी आम रेस्तरां की भांति सब मिलता है, उत्तर भारतीय, चाईनीज़ और दक्षिण भारतीय। लेकिन चूंकि यह मुख्य रूप से उत्तर भारतीय रेस्तरां है इसलिए यहाँ यही भोजन करने की सलाह दूँगा।
अपने अनुभव अनुसार मैं निम्न अंक दूँगा:
बीकानेरवाला - वज़ीरपुर - 7/10
सलाह मान ली गई है. दिल्ली आएंगे तो यहाँ भोजन किया जाएगा.
बील का भूगतान आपके जिम्मे रहा.
बताकर आना मास्साब अमित जी पहले ही बाहर घूमने निकल लेगे.
सही है..तो अब बीकानेरवाले भी हमारी लिस्ट में आ गये. कोई हमें नोएडा की कबाब फैक्टरी का जिक्र भी बता गया है. हम तो कभी वहाँ गये नहीं हैं, बस तारीफ सुनी है.
बिलकुल, यह भी कोई कहने की बात है!!
लेकिन आप आईये तो सही!!
समीर जी, सबके बारे में नहीं कहा। केवल इस बीकानेरवाले की बात की है और इसके यहाँ जो खाया पीया उसकी बात की है, कोई आवश्यक नहीं कि बाकी सब भी बढ़िया हो!
नीरज भाई को पकड़ उनसे पूछ लो। यदि कभी मेरा जाना हुआ तो उसकी रपट यहाँ इस ब्लॉग पर पोस्ट हो जाएगी।