फिर पहुँचे खाने चाइनीज़!!
May 26th, 2007 by amit | 9 Comments
अभी कुछ दिन पहले मैंने चाइनीज़ खाने के लिए बरकोस रेस्तरां के बारे में बताया था। तो पिछले सप्ताहांत पुनः चाईनीज़ खाने का मन हुआ, लेकिन इस बार सोचा कि किसी और रेस्तरां में चला जाए। योगेश से पूछा कि क्नॉट प्लेस स्थित ज़ेन में चला जाए क्या, तो उत्तर मिला “चलो”।
रास्ते में एक बार योगेश ने सुझाव दिया कि ज़ेन की जगह दक्षिण भारतीय खाने के लिए सरवण भवन चलते हैं, लेकिन वहाँ नंबर आने की प्रतीक्षा करते लोगों की संख्या देख हम लोग ज़ेन रेस्तरां की ओर ही मुड़ लिए। वैसे मन ही मन संशय भी था कि दोनों सरवण भवनों(जनपथ वाले और मद्रास होटल के निकट वाले) पर जब भीड़ है तो सप्ताहांत होने के कारण ज़ेन ही कौन सा खाली होगा। वैसे भी रात्रि के तकरीबन साढ़े नौ बज रहे थे।
लेकिन ज़ेन पर भीड़ बिलकुल नहीं थी, हमें केवल एकाध मिनट ही प्रतीक्षा करनी पड़ी, कुछ टेबल खाली हुई और हमको पहली मंज़िल पर एक टेबल मिल गई।
योगेश का ज़ेन में अक्सर आना-जाना रहता है, इसलिए पहली मंज़िल पर मौजूद एक स्टीवर्ड तुरंत योगेश को पहचान गया और हम लोगों का खाने का ऑर्डर लेने आ गया। शुरुआत के लिए योगेश ने बीयर मंगवाई और ऐपीटाईज़र में क्रिस्पी फिश टेन पाल स्टाईल(Crispy Fish Ten Pal Style) मंगवाई गई।
कुछ देर की प्रतीक्षा के बाद ऑर्डर सर्व हुआ; मछली की यह डिश खाने में बहुत ही लज़ीज़ थी। नाम के अनुरूप अधिक कुरकुरी तो नहीं थी लेकिन स्वादिष्ट भरपूर थी, वाकई खाकर मज़ा आ गया और क्षुधा में भी वृद्धि हो गई, एकदम मस्त ऐपीटाईज़र। खाना हमने हल्का ही करने की सोची, इसलिए स्टीम्ड राइस(Steamed Rice) और ज़ेन स्पेशल वेजीटेबल्स(Zen Special Vegetables) मंगवाए गए।
ऐपीटाईज़र और (योगेश को) बीयर समाप्त किए अधिक देर नहीं हुई थी कि हमारा मेन कोर्स(main course) सर्व हुआ। आशा के अनुरूप वेजीटेबल्स स्वादिष्ट थे लेकिन मैं उनको अति-स्वादिष्ट की श्रेणी में नहीं रखूँगा। न जाने क्यों मुझे उनमें कुछ कमी खली जिस वजह से वह मेरे अनुसार अति-स्वादिष्ट की श्रेणी में नहीं आ सकते। लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं कि वे स्वादिष्ट नहीं थे, चावल के साथ उनका संगम अच्छा था और अधिक मसालेदार न होने के कारण भी वे मुझे पसंद आ रहे थे।
इस रेस्तरां में शाकाहारी और मांसाहारी दोनो ही तरह का भोजन परोसा जाता है और साथ ही इसमें बार सुविधा भी है, तो मदिरापान, कॉकटेल वालों के लिए भी सही जगह है। सप्ताहांत या छुट्टी वाले दिन जा रहे हैं, वह भी रात्रि भोज के लिए, तो या तो पहले पहुँचें या अपनी टेबल एडवांस में रिज़र्व करवाकर जाएँ, अन्यथा लंबी प्रतीक्षा के लिए तैयार रहें, हर कोई हम लोगों की तरह भाग्यशाली नहीं होता!!
बरकोस वाली पोस्ट में मैंने कहा था कि बरकोस अपने स्तर के अन्य रेस्तराओं के मुकाबले महँगा नहीं है, सस्ता नहीं है लेकिन महँगा भी नहीं है। तो इस पर श्रीश के कहा था कि चार सौ रूपए में बरकोस महँगा है। तो इस पर अपने सीमित ज्ञान के अनुसार मैं कहना चाहूँगा कि महँगा-सस्ता वस्तु के अनुरूप भी होता है। खाने-पीने के संदर्भ में प्रायः मैं यह देखता हूँ कि जो मैंने खाया-पीया है वह मुझे अच्छा लगा कि नहीं। यदि मुझे दस रूपए की सॉफ़्ट-ड्रिंक पीकर मज़ा नहीं आता तो वह मेरे लिए महँगी है और यदि मुझे बीस रूपए की लस्सी पीकर मज़ा आता है तो वह मेरे लिए महँगी नहीं है। यदि कुछ खा-पीकर आपको तृप्ति होती है तो समझना चाहिए कि पैसे वसूल हो गए, चाहे कितने भी दिए, उस पर किच-किच नहीं करनी चाहिए। यदि कीमत के प्रति इतने ही सजग हैं तो खाने-पीने से पहले देखना चाहिए कि जहाँ खाने-पीने जा रहे हैं वह किस स्तर की जगह है। यदि जेब के अनुरूप नहीं है तो ऐसी जगह नहीं जाना चाहिए, और यदि चले गए हैं तो खा-पीकर कीमत पर पछतावा करने आदि का कोई लाभ नहीं होता।
बहरहाल, कीमत की बात हो रही थी, तो वह आप ज़ेन के मेनू को देखकर ही अंदाज़ा लगा सकते हैं। इस स्तर के अन्य रेस्तराओं के मुकाबले(और बरकोस के मुकाबले भी), यह रेस्तरां महँगा है। एक हेवर्ड्स 5000, फिश वाले ऐपीटाईज़र, स्टीम्ड चावल और उसके साथ ली गई स्पेशल वेजीटेबल्स का हमारा बिल(वैट सहित) तकरीबन सवा सात सौ रूपए का आया।
अपने अनुभव अनुसार मैं निम्न अंक दूँगा:
ज़ेन रेस्तरां - 8/10



क्या दुश्मनी है यार, जब भूख लगी हो व्यंजन की फोटो लिए चले आते हो.
वाह, उम्दा जानकारी. भूख लग आई.
मैंने कहा था कि महंगाई देशकाल के अनुरुप होती है। दिल्ली में आप चार सौ रुपए में सामान्य खाना खा सकते हो जबकि छोटे शहरों में बढ़िया खाना।
‘जेन कथा’ इंटरैस्टिंग रही।
हा हा हा!!
आपके लिए पोस्ट का ऐपीटाईज़र के रूप में प्रयोग हुआ, यह सोचिए।
सही भी है और नहीं भी। जहाँ खा रहे हैं उसके अनुरूप भी बात होती है। मैंने यह नहीं कहा कि बरकोस और ज़ेन दोनों जगह सामान्य खाना था। जब 10 में से 7.5-8 अंक दिए जा रहे हैं तो यकीनन खाना बढ़िया था। लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहाँ चार सौ रूपए सामान्य खाने के लिए कम पड़ जाएँ। जैसे मेरे एक मित्र हाल ही में अपने ऑफिस के सहकर्मियों के साथ एक उच्च स्तरीय रेस्तरां में खाने के लिए गए, दस लोगों के समूह के खाने-पीने का बिल तकरीबन ग्यारह हज़ार रूपए आया। अब वह तो उनकी कंपनी ने वहन किया इसलिए उनकी मौज हो गई वर्ना…!!
लेकिन ऐसा नहीं है कि दिल्ली में आप सस्ते में बढ़िया खा नहीं निपट सकते। उसके बारे में भी आगे बताएँगे। 
यार एक बार बताओ, जब खाना खाने जाते हो कैमरा साथ लेकर जाते हो या सेलफोन से खिंचते हो।
तरूण भाई, हर जगह कैमरा साथ ले जाना तो मुमकिन नहीं, लेकिन मोबाईल फोन तो साथ होता ही है। ये सभी तस्वीरें उसी से खींची हुई हैं।
[…] Feeling hungry? Why not come along and check the first Hindi food blog, Spicy Ice. There’s chinese, a word of caution about crap South-Indian cuisine served in a chain of restaurants called Sagar […]
Kya yeh Hindi ko translate karega?
Please explain what do you mean? Translate Hindi into what?