आओ, मेरे मयखाने में…
May 24th, 2007 by udan-tashtari | 39 Comments
स्वागत है आप सबका मेरे मयखाने में
…चलो, आज पीते हैं एक कॉकटेल जो कि स्वतः बनाई थी मगर रही बड़ी सॉलिड।
तो चलें, शुरु हो जाये हमारे साथ।

जरुरी सामग्री और उनकी मात्रा:
- वोडका (मेरी पसंद बेल्वेदेयर[Belvedere] या एबस्लूट वोडका या कोई भी प्लेन वोडका, स्पाईसी नहीं) - २० ऑन्स
- जिन (मेरी पसंद टेंकरे[Tanquerray], आप कोई सी भी ले लें) - २० ऑन्स
- एपल सॉवर वाईन (हरी वाली) - ४० ऑन्स
- जिंजरेल - बचे गिलास का आधा
- कल्ब सोडा - बाकी हिस्सा
- बर्फ - कसा हुआ
- एक फाँक कटा हरा लाईम
बनाने की विधि:
उपरोक्त समस्त एक गिलास में मिक्स कर लें लेयर्स में, उसी क्रम में जिसमें लिखा है। ढीली हॉफ पैण्ट, डार्क कलर की टी शर्ट, टोपी, चश्मा (फन्नी सा ) पहन कर धूप में कुर्सी लगाकर बैठ जायें और चुस्कियां लें और हर चुस्की के साथ कहते जायें - स्वामी समीरानन्द की जय!!! फिर देखें कि देखने वाले कैसे जलते हैं और आप स्वाद में कैसे खिलते हैं।
अब अगले काकटेल के साथ अगले हफ्ते।
आप इसका बताना, कैसा लगा। इसके साथ चिकिन मत खाने लगना। साथ के चटखे के लिये लाल खरबूजे के छोटे छोटे ठंडे टुकड़ों पर काला नमक डाल कर कांटे से स्टाइल से खाओ न यार!! और बहुत इच्छा हो तो चीज़ के टुकडे दंत खोदनी(Tooth Picker) में फंसा कर चेरी के साथ।
कैसा आनन्द आया, अवश्य बताना!!
अगली बार अपने बार की तस्वीर भी दिखाऊंगा।
जाते जाते इंटरनेट से चुराया हुआ शेर सुन लें:
साकी बस कर अब ज़ाम न भर! मदहोश हुआ बेहोश न कर!
मयखाना महफ़िल खूब हुआ! अब जाने दे मुझे अपने घर!
कल फ़िर से लुटने आऊँगा! मैं और भी दौलत लाऊँगा!
कुछ वादों पर भी यकीन कर! अब हँसते हँसते रुखसत कर!
चित्र आभार
वाह-२ समीर जी, छा गए!! कभी आपके यहाँ आना हुआ तो अवश्य चखेंगे।
Hi,
Is there any alternative for Gin because I dont like Gin. Can I make this cocktail without Gin?
समीर भैय्या, लिखा तो बहुत अच्छा है.
अप्पन को वोदका वगैरह तो नहीं चलती. बस आपके कहे मुताविक एप्पल जूस और रूह अफजा मिलाकर ढीली हॉफ पैण्ट, डार्क कलर की टी शर्ट, टोपी, चश्मा (फन्नी सा ) पहन कर धूप में कुर्सी लगाकर बैठकर चुस्कियां लेते हैं और बोलते हैं
स्वामी समीरानन्द की जय
आपने बनाया है तो जरूर मजेदार पेय होगा, फोटो भी मस्त लग रही है.
बाकि हम जैसे शाकाहारी पीयकड़ो के लिए भी कुछ लाईये
हिक्क, ऐ हियय्य्य.
मज्जा आ गय्य्या.. हिक्क.
बढ़िया, गुरुवर पर उधार रही यह काकटेल!
sameeranandji, itna maal jutaana to mushkil hai - khaskar gingerel, jiska aajtak naam bhi nahin suna- lekin ‘maykhane ki baat me bhi may kuchh kam nahin hoti’, so padhkar maja to aa hi raha hai. baharhaal, hame aap bas itna aur bataa den ki upar vaale gilas jaise kitne le liye jayen ki manushy shighratishighr tullavastha ko prapt ho jaaye.
शराब और शराबी पर कृष्ण कल्पितजी की कुछ सूक्तियां सुनिये-
सिर्फ शराब पीने से
कोई शराबी नहीं हो जाता.
कौन सी शराब
शराबी कभी नहीं पूछता
आजकल मिलते हैं
सजे-धजे शराबी
कम दिखाई पडते हैं सच्चे शराबी.
अपन तो समझे थे कि किसी डिश के साथ मधुशाला सरीखी पंक्तियाँ पढ़ने को मिलेंगी पर यहाँ तो पूरी मय ही बहा दी आपने:)
मैं तो यही गीत गाते यहाँ से रुखसत हो रहा हूँ
ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं….
समीर भाई,
जायका में भी आपका रंग????
वाहSSSSS…………।
अब क्या करें हम भी पूरा लुफ्त नहीं उठा पा रहे है आपके कॉक्टेल का
अभी तलक जो दोस्ती नहीं हुई है इससे!!!
क्या बात है !:(:)
प्रिंटआऊट ले कर रखे ले रहे हैं, किसी बार वाले/वाली के यहॉं जाएंगे तो लिए जाएंगे वहीं कहेंगे. स्वामी समीरानंद की जय।
इस बार वीकेंड को आपका कॉकटेल इस्तेमाल करना पड़ेगा.
संजय भईया, यह मांसाहार कहाँ है? शाकाहार ही तो है, क्योंकि ये जितनी भी मदिराएँ आदि हैं सब फलों और सब्ज़ियों से ही बनती हैं!!
इस बार तो फंस गए गलत शब्द प्रयोग कर!! 
अमित भाई
हम जैन लोग मदिरा को भी शाकाहार की श्रेणी से बाहर रखते है।
समीर भाईजी
ये दुनियाँ ये महफिल मेरे काम की नहीं……..
यहाँ भी आपका रंग .समीर जी,.मयखाना जम गया
वाह! पढ़ कर ही आनंद आ गया।
वाह समीर जी
चाय पर बुलायेंगे तो ज़रूर आऊँगा.. शराब अपने को पचती नहीं..
@अमित भाई-एक बार आओ तो-ऐसे ढ़ेरों नुस्खों के साथ स्वागत किया जायेगा.
@ स्निगधाजी- जिन नहीं पसंद तो कोई बात नहीं. वोदका डबल कर लिजिये न!!
@ धुरविरोधी भाई- चलो, मुद्दा यह है कि आपने कम से कम पोशाक तो वो ही धारण की. अब गिलास में क्या भरे हो, यह तो पीने वाला ही जानता है…
@ संजय भाई- शाकाहरी तो खैर यह भी है मगर आपके लिये नॉन अल्कोहलिक फ्रूट पंच भी लाया जायेगा जल्दी ही!!
@पंकज- खूब मजा लूटो..बिना बहके भी असली पीने का क्या मजा!!
@संजीत बाबू-बिल्कुल, उधार लौटाने वाली साईड नाम चढ़ा लिया है आपका!!
@ चंद्रभूषण जी- कनाडा ड्राई जिन्जरेल तो १९९८ में भी जबलपुर जैसे छोटे शहरों की बार में मिल जाता था जैसा कि मुझे याद है. आप तो स्प्राईट या लाईम कॉरडियल से भी काम चला सकते हैं. पीते चलो बस-बहुत प्रयास नहीं करना पड़ेगा, अपने आप टुल्लावास्था को प्राप्त होंगे..स्वामी जी को याद करते रहें बस्स!!!
@ आलोक भाई- सुक्तियां प्रिंट करके बड़े हर्फों में बार में ही टांग दी हैं और आभार में आपका नाम चढ़ा दिया है. साधुवाद भी लिखा माने.
@ मनीष भाई- चलो, अगली बार से मधुशाला के अंश भी सुनाये जायेंगे और किस ड्रिंक के साथ कौन से गीत का बजना सूट करेगा. आप भी मदद करना.
फ्रूट ज्यूस तो पीते जायें.
@ दिव्याभ भाई- आओ तो सही, दोस्ती तो हम करा देंगे या फ्रूट ज्यूस से काम चला लेना. लुत्फ तो उठा ही लो!!
@परमजीत भाई- कुछ नहीं, बस थोड़ा महफिल सजी है. आप आये, बहार आई!!
@ मसिजीवि जी- प्रिंट आऊट पीने के बाद वापस ले आना अगली बार के लिये. कहीं लगी में वहीं रह गया तब? और जय के लिये खुब पीते रहो का आशीष!!
@ विशेष जी- फिर अगले हफ्ते बताना, कैसा लगा. यहीं वेट करता हूँ आपके वीकेंड के अनुभव का.
@ अमित भाई- सही फंसाया!!
@ सागर भाई- अरे, खरबूजा तो खा लो भाई!!आपके लिये रुहअफजा मिल्कशेक विथ फालूदा भी तैयार कराया जायेगा
@ रंजना जी- वाह, आप आई हैं तो अब तो मयखाना जमना ही था.
@ गायत्री जी-धन्यवाद!!
@अभय भाई-चाय, ज्यूस, लस्सी-बस अपनी पसंद बतायें और चले आयें. स्वागत में कमी नहीं होगी. खरबूजा तो खा लें तब तक.
समीरजी जरा ये ड्रिंक मेल तो कीजिये…..
यहाँ दिल्ली मे तो नही पर गोवा मे जरुर ट्राई करेंगे। अगली कॉकटेल का इन्तजार रहेगा। और हां कॉकटेल का नाम भी तो बताइए ।
@भुवनेश भाई- इन्तजार करिये, जरुर मेल की जायेगी. वैसे आप ही आ जाओ मेल से…तो साथ ही बैठ कर लुत्फ लिया जाये.
@ ममता जी- आपका आदेश कैसे टालें. जल्दी ही लाते है अगली कॉकटेल. हमारी कॉकटेल खुद अनुसंधान के बाद यहीं आश्रम में स्वामी समीरानन्द जी की देख रेख में पूर्ण प्राकृतिक तरीके से तैयार की जाती हैं और समीरानन्द पेय और फिर अंक के द्वारा जाने जाते हैं. इसे आप समीरानन्द पेय क्रमांक १ नोट कर लें. हम क्रमानुसार से पेश करते रहेंगे.
सभी पेय स्वामी जी स्वयं पीकर क्वालिटि कन्ट्रोल अप्रूवल देते हैं, तब बाहर कोई पी सकता है.
@संजय भाई,
हम तो इन कॉकटेल आदि के शौकीन नहीँ है, पर हाँ वही कहते जो अमित जी ने पकड़ लिया। न केवल यह पूर्णत: शाकाहारी है, बल्कि फ़लाहारी ही है - और उसपर भी आसवन की प्रक्रिया से तो अशुद्धियाँ और भी निकल जाती है। आयुर्वेद में तो कई प्रकार के आसव-आरिष्ट आदि औषधि के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
@समीरानन्द जी,
धन्य हो महाराज, कितना ख्याल है भक्तों का कि शबरी की तरह स्वाद लेने के बाद अपने आराध्य (यहाँ चेले पढ़ें) को फार्मूला और सेवन की सलाह देते हो। होम्योपैथी के जनक डा. हैनीमैन ने भी शायद सभी या कई दवाओं का अपने ऊपर परीक्षण किया था उन्हें सुझाने से पहले। डा. प्रभात टंडन से पूछा जाय अधिक जानकारी हेतु।
@ राजीव जी- ऐसे चेलों की स्वामी समीरानन्द जी को हमेशा प्रतीक्षा रहती है. आपने उनका काम कितना आसान कर दिया संजय भाई को ज्ञान देकर.
अब हैनीमैन तो हमारे बाद के हैं उनका क्या कहूँ. बस उत्तम कार्यों के लिये बधाई के सिवाय. हाँ, डॉक्टर प्रभात कुछ रोशनी डाल पायें.
समीर भाई,बहुत सुंदर बार बनाई है काश ये चाय की होती..टी-बार और हम भी होते आपके साथ…गरम-गरम लजिज़ पकौडो के साथ….:)
सुनीता(शानू)
@सुनीता जी
चाय चढ़ा दी इतनी डिमांड देखते हुये. अगली ड्रिंकस के साथ पकोडे का भी प्रबंध कर रहे हैं. हर फरमाईश पूरी होगी. आप कहेंगी तो चाय-पकोडे क्या, कविता भी सुना ही देंगे.
@भावना जी
सही है। दुकान चल निकली!
@ अनूप जी
आपका आशीष रहे तो कोई भी दुकान चल जाये, फिर यह तो हमारी है…
अरे यार! हम आपकी काकटेल पीकर टैं क्या हुए, आप तो सारी की सारी तारीफ़ अकेले झटक लिए। अरे हमारा कित्ता बड़ा रोल था इसमे, ये नही बताएंगे सबको?
ये..
अच्छी…
बात…
नही…
है…
कॉकटेल बहुत मारू थी, मजा आ गया, मिलावट बड़ी घातक थी, अगली बार वेरीएशन करेंगे।
सागर जी, आपने तो इस सीधे साधे शब्द को सबजेक्टिव बना दिया!! अब आप किस शब्द का क्या अर्थ समझते हैं यह हम साधारण मानस कैसे जान सकते हैं??
आगे से कृपया जिन शब्दों के आप आम धारणा से अलग अर्थ रखें उनके बारे में पहले से बता दिया करें। अब यहाँ देखिए, मैं तो खामखा उछल रहा था कि संजय भईया को फांस लिया इस बार!!
चंद्रभूषण जी, यह जिन्जर ऐल(Ginger Ale) है जो कि किसी भी ठीक ठाक मोहल्ले में मौजूद अंग्रेज़ी के ठेके पर मिल जाएगी।
अमां हम नॉनपियक्कड़ों के लिए भी कुछ बंदोबस्त किया जाए। चाय मैं पीता नहीं, जूस वगैरा चलेगा।
अमित भाई का ढ़ाबा तो चल निकला यार, सच है मदिरा कि महिमा और वो भी स्वामी समीरानंद की मदिरा। पूरी ३४ टिप्पणियाँ।
ये क्या बता दिया यहा तो ऐसे सारी बोतल खाली कर के भी नशा नही होगा,जब तक अगला जाम बनेगा पिछले का नशा गायब,और गर होश ही रहा तो पैसे बेकार गये ना,कोई फ़टाफ़ट उडेलने का तरीका बताते पटियाला पैग को
@ जीतू भाई- सारी तारीफ जीतू भाई, अमित बाबू और हमारे बीच बाँटी जा रही है पूरे होशो हवास में. कोई रेसिपि लाया, कोई फोटू तो कोई शेर (वो नेट से चोरी वाला
)
अब सही रहा-बँटवारा…..बाकि तो प्रपोरशन दो तीन ड्रिंक बनाते बनाते अपने अपने झेलन क्षमता लायक एडजस्ट हो ही जाता है.
@ अमित भाई- वही मुझे भी ख्याल आ रहा था कि जिंजर ऐल तो हम १९९८ में जब भारत में रहते थे तभी आ गया था. आपने मोहर लगा दी.
@ श्रीश भाई- आप लोगों का स्नेह मिलता रहेगा तो ढ़ाबा चलता रहेगा..समीरानन्द का क्या है—यह तो स्पाईसी आईस की टीम की महिमा है. कभी उत्तरांचल की भी स्पेशल आईटम लायें.
@ अरुण भाई- अरे, तीन-चार इक्क्ठे बना कर रख लो…और बर्फ मिला कर पीते चलो..जब फिर नींद खुले, तब घर निकल लें. ज्यादा पीना स्वास्थ के लिये अच्छा नहीं. यह सिर्फ वैधानिक चेतावनी है. वैसे तो जिन्जरेल और सोड़ा की मात्रा कम करके जीन और वोड़को के लिये रिजर्वेशन कर सकते हो कोटा ही तो बढ़ाना है.
समीर जी, यहाँ मयखाना खोल कर बैठे हैं, हम भी सोचें अचानक पीने वाले कैसे बढ़ गये
काकटेल दिखती तो मस्त है अब हम पीते तो हैं नही देख कर ही झूम लेते हैं।
[…] made mango ice-cream as Garima gives you her recipe. But that’s not all, as Sameer shares his recipe of a cool cocktail that he made accidently! This is supposed to be a bilingual blog, so in future there’ll be […]