दक्षिण भारतीय या कुछ और?
May 22nd, 2007 by amit | 13 Comments
हर जगह, छोटे से छोटे शहर कस्बे में भी दक्षिण भारतीय और चाईनीज़ भोजन या उससे मिलता जुलता कुछ मिल ही जाता है। लेकिन अधिकतर वह उन पाक-प्रणालियों(cuisines) का घोर अपमान ही होता है। अब छोटे शहर आदि में मिलने वाले इस तरह के भोजन को एक बार नज़रअंदाज़ किया जा सकता है, लेकिन दिल्ली जैसे महानगर में बड़े रेस्तराओं में यदि किसी पाक-प्रणाली का अपमान हो, वह भी ऐसे रेस्तरां में जो केवल उस पाक प्रणाली के भोजन सर्व करता हो, तो यह कतई अनदेखा नहीं किया जा सकता।
अभी कुछ दिन पहले मेरे मित्र मोन्टू और हितेश ने अपने जन्मदिन की बकाया पार्टी दी, या यूँ कहें कि हम लोगों ने उनको पार्टी की याद दिलाई जिसका वायदा उन्होंने किया था। चूँकि अपने जन्मदिन पर मोन्टू विदेश में था इसलिए उसने वायदा किया था कि वो और हितेश अपने जन्मदिन की पार्टी एकसाथ(दोनो का जन्मदिन 22 अप्रैल है) मोन्टू के वापस आने पर देंगे। तो एक दिन तय कर हम लोग साकेत में मिले और उसके बाद रात्रि भोज के लिए जगह आदि पर विचार विमर्श करने लगे। और आखिरकार हितेश के सुझाव पर मालवीय नगर की ओर चल पड़े। कई रेस्तरां दिखे लेकिन बहुमत दक्षिण भारतीय रेस्तरां सागर रत्न जाने का हुआ, तो मैं भी कुछ अनमने ढंग से चल पड़ा। अनमने ढंग से इसलिए क्योंकि दिल्ली के बहुत से सागर रत्न रेस्तराओं का अनुभव है और वहाँ पता नहीं क्या सर्व किया जाता है क्योंकि भोजन कहीं से दक्षिण भारतीय नहीं होता। मैंने तो निश्चय कर लिया था कि बाकी लोग बेशक वहाँ दक्षिण भारतीय खाएँ, मैं तो उत्तर भारतीय ही लूँगा, कम से कम अधिक बुरा अनुभव तो नहीं रहेगा!!
अब लोगों के स्वाद तंतुओं का तो पता नहीं कि वे कैसे सागर रत्न में परोसे जाने वाले दक्षिण भारतीय खाने को झेल जाते हैं, कदाचित् उन्होंने इससे बढ़िया दक्षिण भारतीय भोजन चखा ही न हो या फिर हो सकता है कि वे परवाह ही नहीं करते हों कि वे क्या खा रहे हैं। अब एक-दो को छोड़ मुझे नहीं लगता कि अपनी मंडली में भी किसी को भोजन पसंद आया। योगेश ने भोजन के पश्चात आइसक्रीम संडे(ice-cream sundae) मंगवाया जो कि देखने में तो ठीक-ठाक लग ही रहा था, स्वाद में भी ठीक था, कम से कम भोजन से तो बहुत अच्छा था। मेरे द्वारा मंगवाया गया उत्तर भारतीय भोजन(कश्मीरी पुलाव और नवरत्न कोरमा) भी सागर रत्न में परोसे जाने वाले अन्य चीज़ों जैसा बेस्वाद ही था, बस निराशा नहीं हुई क्योंकि उससे बढ़िया कुछ अपेक्षित भी नहीं था। भोजन के पश्चात मैंने बासुन्दी मंगवाई जो कि भोजन के मुकाबले काफी अच्छी थी।
क्या आप खाने के बाद भोजन पर पछताना पसंद करते हैं? कदाचित् नहीं, इसलिए मेरे अनुभव से लाभ उठाएँ और सागर रत्न में भोजन के लिए नहीं जाएँ। जब व्यक्ति पैसे खर्च करता है और उसके बाद भी उसे कीमत की वसूली नहीं होती तो बहुत बुरा लगता है। पचास-साठ रूपए का डोसा या उत्थपम लेने के पश्चात भी यदि वह दो कौड़ी का भी नहीं लगे तो गुस्सा आना लाज़मी है। इससे बढ़िया तो मेरे घर के पास दक्षिण भारतीय परोसने वाला छोटा ढाबा प्रकार का रेस्तरां है जो सागर रत्न में परोसे जाने वाले डोसे-सांबर आदि से बढ़िया आपको केवल बीस-पच्चीस रूपए में देता है।
अपने अनुभवानुसार यही कहूँगा कि एक डिफेन्स कालोनी की मार्किट में मौजूद सागर रत्न थोड़ा बहुत ठीक भोजन परोसता है, बाकी कोई सागर रत्न मुझे ऐसा दिखा नहीं जहाँ अच्छा दक्षिण भारतीय भोजन परोसा जाता है।
यदि आपको दक्षिण भारतीय भोजन करना है तो उसके लिए सरवण भवन(यह एक दक्षिण भारतीय रेस्तराओं की बहुराष्ट्रीय चेन है और भारत में इनके रेस्तरां दिल्ली, चेन्नई, वेल्लोर और कांचीपुरम में हैं) बहुत उम्दा जगह है। मैंने इसके जनपथ स्थित रेस्तरां में भोजन किया है और यह मैं बेहिचक कह सकता हूँ कि वह अब तक का मेरा सबसे बढ़िया दक्षिण भारतीय भोज था। भारत के बाहर भी इनके कई देशों में रेस्तरां हैं, कनाडा में इनके रेस्तरां ओन्टारियो में हैं(कदाचित् समीर जी इसके बारे में बता सकें) और अमेरिका में इनके रेस्तरां सन्नीवेल(केलिफोर्निया), न्यू जर्सी और न्यूयार्क में हैं(किसी बंधु का यदि अनुभव रहा हो तो अवश्य बांटे)।
अपने अनुभव अनुसार मैं दक्षिण भारतीय भोजन में निम्न अंक देता हूँ:
सागर रत्न - 1.5/10
सरवण भवन - जनपथ - 8/10

हमें तो सरवण भवन ( हम उसे स्वर्णा बुलाते हैं) में खाना बहुत भाता है. सागर रत्न में कभी खाया नहीं तो कम्पेयर नहीं कर सकता. मगर यहाँ के स्टेंडर्डस पर तो ९/१० आराम से दिया जा सकता है मगर भारत वाला स्वाद तो फिर भी याद आता रहता है जो हमारे जबलपुर के अन्ना की होटल में सांभर इडली का था. बढ़िया जानकारी दी. आभार!!
एक राज की बात सुनाता हूं
या यूं कहे अनुभव बताता हूं
खाना तो मैं भी कई जगहों पर खाता हूं
पर जो स्वाद मेरी पत्नी की रसोई में है
उसे बताने में स्वयं को अक्षम पाता हूं।
अरे भाई, मालवीय नगर के सागर रत्न मे जाने से पहले, कम से कम मालवीय नगर मे रहने वालों से तो पूछ लेते। मै जब दिल्ली मे रहता था तो यहीं मालवीय नगर के पास ‘शिवालिक’ में रहता था, हम एक बार सिर्फ़ सागर रत्न गए थे, दूसरी बार जबरदस्ती ले जाए गए थे। बस तब से कान पकड़ लिए थे। वो दिन है और आज का दिन, सागर रत्न की तरफ़ नज़र उठाकर भी नही देखते।दक्षिण भारतीय खाने का वो स्वाद ही नही आ पाया, जो आना चाहिए था।
इससे अच्छा तो कनाट प्लेस वाला (मद्रास होटल के पास) रेस्टोरेंट है, जहाँ खाने मे टेस्ट तो होता है।
what ever you have wriiten about both the eating places is absolutely correct.
यानि कि विदेश में भी इनके द्वारा परोसा गया भोजन स्वादिष्ट होता है, यह जानकर खुशी हुई।
हा हा हा!!
अरे भाई मैं भी जबरदस्ती(बहुमत के कारण) ले जाया गया था और दोस्त लोगों का मन रखने के लिए मैं चला गया, वर्ना सागर रत्न में तो मैं सपने में भी नहीं जाता!!
Hi,
I am not very fond of south indian cuisine. So even if it had sertved the best of south indian, I still would not have gone there out of choice.
सही कहा यहाँ सन्नीवेल का सरवाना भवन बहुत गजब का खाना बनाता है हालांकि उनकी अत्यधिक प्रसिद्धि की वजह से ये लोग अपने ग्राहकों को जल्दी जल्दी रोटेट करना चाहते हैं माने आपका खाना खतम नहीं हुआ होता और बिल पहले आ जाता है। शुक्रवार के डिनर या फिर शनिवार को कभी भी पहुंचों 30-45 मिनट का इंतजार लाजमी है। सरवाणा भवन से पहले सिलिकन वैली का दक्षिण भारतीय रेस्तंरा उडीपी होता था पर सरवाना वालों ने आकर उनकी मार्किट पीट दी है।
पचास-साठ रूपए का डोसा या उत्थपम
पचास साठ रुपये का डोसा ऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ आठ नौ रुपये की चीज के साठ रुपये और स्वाद - बेस्वाद, वाकई बौत नाइन्साफी हुई है आपके साथ।
भाई अब का तो पता नही क्यूंकि कई साल से दिल्ली से बाहर है पर एक ज़माने मे सागर रत्न जो डिफेंस कॉलोनी मे है वहां का खाना अच्छा होता था और हमे तो पसंद भी था। अब आप चाहे जो समझे।
ममता जी, मैंने भी उपर अपनी पोस्ट में यही लिखा है। मैंने तकरीबन ढाई वर्ष पहले डिफेन्स कालोनी वाले सागर रत्न में खाया था, एकाध मित्र ने हाल ही में भी खाया है और यही निष्कर्ष निकला है कि डिफेन्स कालोनी वाला फिर भी थोड़ा बहुत ठीक ठाक है, बाकी तो निहायत ही घटिया हैं।
Where in new jersey? any idea?
ये रहा न्यू जर्सी का पता तरूण भाई।
[…] and check the first Hindi food blog, Spicy Ice. There’s chinese, a word of caution about crap South-Indian cuisine served in a chain of restaurants called Sagar Ratna and a mention of tasty South-Indian food served in multinational chain Sarvana Bhawan. If the […]